• Home
  • About Us
  • Advertise With Us
  • Contact Us
  • Privacy Policy
  • Terms & Conditions
Wednesday, January 14, 2026
  • Login
Lucknow Junction
Advertisement
  • Home
  • ट्रेंडिंग न्यूज़
  • देश
  • विदेश
  • उत्तर प्रदेश
  • विशेष
  • विभागीय
  • E-Magazine
  • अन्य
  • Home
  • ट्रेंडिंग न्यूज़
  • देश
  • विदेश
  • उत्तर प्रदेश
  • विशेष
  • विभागीय
  • E-Magazine
  • अन्य
No Result
View All Result
Lucknow junction

“प्राइवेट स्कूल का मास्टर: सम्मान से दूर, सिस्टम का मज़दूर”

News-Desk by News-Desk
April 17, 2025
in ट्रेंडिंग न्यूज़
0
सरकारी स्कूलों को बन्द करने की बजाय उनका रुतबा बढ़ाये। 

 

“प्राइवेट स्कूल का मास्टर: सम्मान से दूर, सिस्टम का मज़दूर”

चॉक से चुभता शोषण: प्राइवेट स्कूल का मास्टर और उसकी गूंगी पीड़ा।

प्राइवेट स्कूलों में शिक्षकों से उम्मीदें तो आसमान छूती हैं, लेकिन उन्हें न तो उचित वेतन मिलता है, न सम्मान, न छुट्टी और न ही सुरक्षा। महिला शिक्षक दोहरी ज़िम्मेदारियाँ उठाती हैं, वहीं शिक्षक दिवस के दिन सिर्फ प्रतीकात्मक सम्मान मिलता है जबकि सालभर उनका शोषण जारी रहता है।
अभिभावक, स्कूल प्रबंधन और सरकार तीनों ही इस शोषण को नजरअंदाज़ करते हैं। शिक्षक के अधिकारों की कोई बात नहीं करता, न ही कोई नियामक संस्था है जो उनके हितों की रक्षा करे। शिक्षकों को कानूनी संरक्षण, संगठित मंच और सामाजिक सम्मान मिलना चाहिए ताकि शिक्षा प्रणाली सच में समावेशी और न्यायपूर्ण बन सके। यदि राष्ट्र को शिक्षित और सशक्त बनाना है, तो सबसे पहले शिक्षक को शोषण से मुक्त करना होगा—क्योंकि चॉक से लिखा हर अक्षर, देश का भविष्य गढ़ता है।
-प्रियंका सौरभ
एक समय था जब “गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पाय” जैसे दोहे बच्चों की जुबान पर होते थे। आज हाल ये है कि अगर मास्टर जी मोबाइल पकड़ लें तो कहा जाता है—”इतनी फुर्सत है तो बच्चों को क्यों नहीं संभालते?” ज़माना बदल गया है, अब ‘शिक्षक’ शब्द पवित्रता नहीं, सहनशीलता का प्रतीक बन गया है। और इस सहनशीलता का सबसे क्रूर रूप दिखता है—प्राइवेट स्कूल के शिक्षकों की दुनिया में।
दिखावे का महल, भीतर हताशा का दलदल
बाहर से देखिए तो प्राइवेट स्कूल किसी फाइव स्टार होटल से कम नहीं लगता—एसी क्लासरूम, हाईटेक बोर्ड, इंग्लिश बोलते बच्चे और व्हाइट-ग्लव्स पहने बस अटेंडेंट्स। लेकिन अंदर झाँकिए, वहाँ एक मास्टर साब बैठा है, जो न वक्त पर चाय पी सकता है, न लंच कर सकता है। जो बच्चा होमवर्क न करे, उसकी शिकायत आए तो मास्टर की क्लास लगती है। जो बच्चा एग्ज़ाम में फेल हो जाए, तो मैनेजमेंट पूछता है—”क्यों पढ़ाया नहीं ढंग से?”
तनख्वाह: जो कागज़ पर है, जेब में नहीं
प्राइवेट स्कूलों में सैलरी का सिस्टम इतना गोपनीय है कि सीक्रेट एजेंसियाँ भी शर्मा जाएं। अपॉइंटमेंट लेटर पर ₹25,000 लिखा होता है, लेकिन बैंक में ₹8,000 ट्रांसफर होते हैं। बाकी कैश में मिलते हैं या कभी नहीं मिलते। और मज़ा देखिए—टीचर से सैलरी का हिसाब माँगा जाए तो जवाब होता है: “बोलिए, नौकरी चाहिए या नहीं?”
महिला शिक्षकों का ‘दोहरा शोषण’
घर में बहू, माँ और पत्नी। स्कूल में मैडम, टीचर और दीदी। महिला शिक्षकों को दोहरी ज़िम्मेदारी के साथ जीना पड़ता है। सुबह 5 बजे से घर संभालो, फिर स्कूल जाओ और वहाँ 40 बच्चों की जिम्मेदारी उठाओ। ऊपर से अगर पति भी प्राइवेट सेक्टर में हो, तो महीने की सैलरी से पहले ही घर का बजट गिरवी रख देना पड़ता है।
छुट्टी? वो तो सपना है!
सरकारी कैलेंडर कहता है—15 अगस्त छुट्टी है, 26 जनवरी छुट्टी है, लेकिन प्राइवेट स्कूल कहता है—“आओ, झंडा फहराओ, भाषण दो, फिर हाजिरी लगाओ और जाओ।” छुट्टी के दिन भी हाज़िरी की मजबूरी। अगर बीमार पड़ गए, तो HR कहेगा—”छुट्टी नहीं है, डिडक्शन लगेगा।” शिक्षक का गला बैठ जाए, तब भी कहा जाता है—“क्लास तो लेनी होगी, और कोई नहीं है।”
 काम का बोझ और भावनात्मक शोषण
आज शिक्षक सिर्फ पढ़ाता नहीं है, वो क्लास टीचर है, परीक्षा नियंत्रक है, अभिभावक संवाद अधिकारी है, व्हाट्सएप ग्रुप एडमिन है, स्पोर्ट्स डे का आयोजक है और हर हफ्ते सेल्फी वाले वीडियो का संपादक भी। लेकिन जब सैलरी की बात आए, तो कहा जाता है—“आप तो सिर्फ दो पीरियड पढ़ाते हैं।”
 मास्टर के आंसू और प्रिंसिपल का प्रेस कॉन्फ्रेंस
बच्चा अगर टॉप करे तो प्रिंसिपल प्रेस कॉन्फ्रेंस करता है—“हमारे स्कूल का वातावरण ही ऐसा है।” और अगर बच्चा फेल हो जाए तो मास्टर की जवाबदेही तय होती है—“आपने ठीक से पढ़ाया नहीं।” जीत स्कूल की, हार शिक्षक की। फोटो बैनर पर प्रिंसिपल की, मेहनत मास्टर की।
पैरेंट्स की उम्मीदें: टीचर या जादूगर?
आजकल अभिभावक चाहते हैं कि शिक्षक 3 महीने में उनके बच्चे को आईएएस बना दे, और अगर ऐसा न हो पाए तो कहते हैं—“हम तो सरकारी स्कूल में डाल देते तो भी क्या फर्क पड़ता!” बच्चे की गलती भी अब मास्टर की जिम्मेदारी है। पैरेंट्स मीटिंग में सबसे ज़्यादा डांट मास्टर खाता है।
शिक्षक दिवस: एक दिन की इज़्ज़त, साल भर की जिल्लत
5 सितंबर को बच्चों से “हैप्पी टीचर्स डे” के फूल मिलते हैं। बच्चे गाना गाते हैं—”सर आप महान हैं” और अगले ही दिन वही बच्चा होमवर्क न करने पर कहता है—”टीचर का क्या है, कुछ भी बोल देते हैं।” साल भर की जिल्लत को एक दिन की इज़्ज़त से ढकना, अब आदत बन गई है।
कानून कहां है? शिक्षा नीति सिर्फ कागज़ पर
नई शिक्षा नीति 2020 कहती है कि शिक्षक की स्थिति मज़बूत होनी चाहिए। लेकिन ज़मीनी हकीकत ये है कि न कोई रेगुलेशन है, न कोई निगरानी। जिला शिक्षा अधिकारी सिर्फ सरकारी स्कूलों की जांच करता है, प्राइवेट स्कूलों को छूट मिली हुई है—”अपना नियम खुद बनाओ, खुद चलाओ।”
छात्र और शिक्षक: एकतरफा रिश्ता
आज छात्र अधिकारों की बात करता है—मार नहीं खाना, होमवर्क कम मिलना, रिजल्ट अच्छा आना। लेकिन शिक्षक के अधिकारों की बात कौन करे? क्या कोई RTI लगा सकता है कि मास्टर को कितनी सैलरी मिल रही है? नहीं। क्योंकि शिक्षक अधिकारों की बात करना आज भी “असहनीय” माना जाता है।
समाधान: मौन नहीं, आंदोलन चाहिए
अब वक़्त आ गया है कि शिक्षक चुप्पी तोड़े। सरकार को चाहिए कि एक रेगुलेटरी बॉडी बनाए जो प्राइवेट स्कूलों की सैलरी, काम के घंटे, छुट्टियाँ और काम का बोझ तय करे।
हर जिले में निजी शिक्षकों की यूनियन बने जो एक स्वर में बोले। अभिभावकों को भी समझना होगा कि शिक्षक सिर्फ एक वेतनभोगी कर्मचारी नहीं, बल्कि उनके बच्चे के भविष्य का निर्माता है।
थोड़ा सम्मान, थोड़ा अधिकार—इतनी सी बात
देश अगर आगे बढ़ना चाहता है तो सबसे पहले उस हाथ को संभालना होगा जो ब्लैकबोर्ड पर चॉक से भविष्य रचता है। उस आवाज़ को सुनना होगा जो हर दिन “गुड मॉर्निंग” कहकर बच्चे को दिन की शुरुआत सिखाता है। शिक्षक की मुस्कान में देश की मुस्कान छिपी है, लेकिन उस मुस्कान के पीछे कितना दर्द है, ये जानने वाला कोई नहीं।
अंत में बस इतना ही—
“बच्चा फेल हो जाए तो शिक्षक जिम्मेदार। बच्चा टॉप कर जाए तो स्कूल का नाम।” ये संतुलन तोड़ना होगा। अगर प्राइवेट स्कूलों को सचमुच शिक्षा का मंदिर बनाना है, तो पहले उसमें शिक्षक की पूजा होनी चाहिए—कम से कम उसका शोषण तो बंद हो।

The post “प्राइवेट स्कूल का मास्टर: सम्मान से दूर, सिस्टम का मज़दूर” appeared first on ब्रेकिंग न्यूज एक्सप्रेस | Latest Hindi News | Breaking News | Politics | Sports – Breaking News Express.

खबरें हटके

BIHAR ELECTION-महिलाओं को 10 हजार रुपये देने के लिए किया गया वर्ल्ड बैंक का फंड का इस्तेमाल -जनसुराज पार्टी

BIHAR ELECTION -लालू यादव के घर में घमासान शुरू ,बहन रोहिणी के अपमान प्रताप ने कह दी ये बड़ी बात

Post Views: 29
Tags: "The Master of the Private School:
Previous Post

बाजारीकरण के चंगुल में फंसी शिक्षा

Next Post

 बेहाल बुजुर्ग

Related Posts

BIHAR ELECTION-महिलाओं को 10 हजार रुपये देने के लिए किया गया वर्ल्ड बैंक का फंड का इस्तेमाल -जनसुराज पार्टी
ट्रेंडिंग न्यूज़

BIHAR ELECTION-महिलाओं को 10 हजार रुपये देने के लिए किया गया वर्ल्ड बैंक का फंड का इस्तेमाल -जनसुराज पार्टी

by News-Desk
November 16, 2025
BIHAR ELECTION -लालू यादव के घर में घमासान शुरू ,बहन रोहिणी के अपमान प्रताप ने कह दी ये बड़ी बात
ट्रेंडिंग न्यूज़

BIHAR ELECTION -लालू यादव के घर में घमासान शुरू ,बहन रोहिणी के अपमान प्रताप ने कह दी ये बड़ी बात

by News-Desk
November 16, 2025
जोधपुर के बालेसर में हुआ भीषण सड़क हादसा ,6 लोगों की मौत ,14 घायल
ट्रेंडिंग न्यूज़

जोधपुर के बालेसर में हुआ भीषण सड़क हादसा ,6 लोगों की मौत ,14 घायल

by News-Desk
November 16, 2025
NEW DELHI-सुबह- सुबह कॉफी की चुस्की !जानिए कितनी फायदेमंद और कितना करती है नुकसान
ट्रेंडिंग न्यूज़

NEW DELHI-सुबह- सुबह कॉफी की चुस्की !जानिए कितनी फायदेमंद और कितना करती है नुकसान

by News-Desk
November 16, 2025
अब आंख बताएगी हेल्थ रिपोर्ट, रेटिना स्कैन से पकड़ी जाएगी बीमार
ट्रेंडिंग न्यूज़

अब आंख बताएगी हेल्थ रिपोर्ट, रेटिना स्कैन से पकड़ी जाएगी बीमार

by News-Desk
November 16, 2025
Next Post
 बेहाल बुजुर्ग

 बेहाल बुजुर्ग

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Cricket Live Score

POPULAR NEWS

No Content Available

EDITOR'S PICK

माइक्रोसॉफ्ट की 50वीं वर्षगांठ पर हंगामा, कर्मचारियों ने इजराइल से एआई डील का किया विरोध

माइक्रोसॉफ्ट की 50वीं वर्षगांठ पर हंगामा, कर्मचारियों ने इजराइल से एआई डील का किया विरोध

April 5, 2025
ट्रंप बनाम हार्वर्ड: शिक्षा की आज़ादी पर टकराव, ओबामा बोले- तानाशाही के खिलाफ खड़ी हुई यूनिवर्सिटी

ट्रंप बनाम हार्वर्ड: शिक्षा की आज़ादी पर टकराव, ओबामा बोले- तानाशाही के खिलाफ खड़ी हुई यूनिवर्सिटी

April 17, 2025
विश्व को भारत ने सैन्य नीति का लोहा मनवाया-अमेरिका को परमाणु युद्ध का डर सताया-

विश्व को भारत ने सैन्य नीति का लोहा मनवाया-अमेरिका को परमाणु युद्ध का डर सताया-

May 13, 2025
NEW DELHI-ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में भारतीय मूल की गर्भवती महिला की सड़क हादसे में मौत

NEW DELHI-ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में भारतीय मूल की गर्भवती महिला की सड़क हादसे में मौत

November 19, 2025

About Us

लखनऊ जंक्शन एक विश्वसनीय न्यूज़ पोर्टल है, जो लखनऊ और आसपास की ताज़ा, सटीक और निष्पक्ष खबरें आप तक पहुँचाने के लिए समर्पित है। राजनीति, समाज, शिक्षा, व्यापार, खेल और मनोरंजन से जुड़ी हर अहम जानकारी यहां मिलेगी। हम आपकी आवाज़ को मंच देने और शहर की हर हलचल से आपको अपडेट रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। लखनऊ की हर खबर, सबसे पहले, निष्पक्ष और विश्वसनीय रूप में!
E-Mail Id-lucknowjunction51@gmail.com

Follow us

Categories

  • E-Magazine
  • अन्य
  • उत्तर प्रदेश
  • ट्रेंडिंग न्यूज़
  • देश
  • विदेश
  • विभागीय
  • विशेष

Our Visitors

1752306
Total Visitors
137
Visitors Today

Recent Posts

  • नई दिल्ली-सरकार ने डिलीवरी बॉय को दी ये बड़ी राहत ,अब 10 मिनट में नहीं मिलेगा ऑनलाइन सामान January 13, 2026
  • नई दिल्ली-सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और डॉग लवर्स को दिया बड़ा झटका January 13, 2026
  • ऋषिकेश-टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड की क्रेडिट रेटिंग “AA+” में हुई अपग्रेड January 13, 2026
  • Home
  • ट्रेंडिंग न्यूज़
  • देश
  • विदेश
  • उत्तर प्रदेश
  • विशेष
  • विभागीय
  • E-Magazine
  • अन्य

©Copyright 2025, All Rights Reserved For Lucknow Junction by RA.Tech (7985291626)

No Result
View All Result
  • Home
  • ट्रेंडिंग न्यूज़
  • देश
  • विदेश
  • उत्तर प्रदेश
  • विशेष
  • विभागीय
  • अन्य
  • E-Magazine
  • Login

©Copyright 2025, All Rights Reserved For Lucknow Junction by RA.Tech (7985291626)

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Create New Account!

Fill the forms below to register

All fields are required. Log In

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In