पृथ्वी की पपड़ी में हाइड्रोजन के भंडार

विज्ञानियों के अनुसार पृथ्वी की पपड़ी में हाइड्रोजन के विशाल भंडार छिपे हुए हैं, और यदि हमें इस गैस के दोहन का कोई विश्वसनीय तरीका मिल जाए, तो हमारी ऊर्जा की जरूरतें लंबे समय तक पूरी हो सकती हैं। वर्तमान में, दुनिया हाइड्रोजन गैस पर ईंधन स्रोत के रूप में अत्यधिक निर्भर है, और इसे संतुलित कार्बन उत्सर्जन लक्ष्यों तक पहुंचने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। शोधकर्ता पृथ्वी की पपड़ी में कैद गैस के विशाल भंडार खोजने के तरीकों पर काम कर रहे हैं। उनका मानना है कि इन भंडारों का उपयोग करके हम 170,000 वर्षों तक अपनी हाइड्रोजन ऊर्जा की जरूरतों को पूरा कर सकते हैं। इसका अर्थ यह है कि हमें हाइड्रोजन का उत्पादन करने के लिए हाइड्रोकार्बन का उपयोग नहीं करना पड़ेगा, जो कार्बन डाईआक्साइड उत्सर्जन में योगदान देता है।
मालूम हो कि भूविज्ञानियों ने हीलियम गैस का सफलतापूर्वक अन्वेषण करने के लिए एक रणनीति विकसित की है। अब हाइड्रोजन गैस के दोहन के लिए भी इसी तरह का दृष्टिकोण अपनाया जा सकता है। हाइड्रोजन गैस तब बनती है जब पानी उन चट्टानों के संपर्क में आता है, जो लोहे से भरपूर होती हैं या जिनमें रेडियोधर्मी तत्व होते हैं। इसके लिए तापमान, दबाव और समय जैसे कुछ अन्य मानदंड भी पूरे होने चाहिए। इन सभी कारकों पर विचार करके और पृथ्वी पर उनकी मौजूदगी का मानचित्रण करके, शोधकर्ता इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि जमीन के नीचे बहुत सारी हाइड्रोजन हो सकती है, जिसका दोहन किया जा सकता है। माली में बौराकेबोगी साइट पर इसी तरह से प्राकृतिक हाइड्रोजन का उत्पादन किया जा रहा है। बौराकेबौगौ के निवासी दुनिया में पहले ऐसे लोग हैं, जो हाइड्रोजन गैस को जला कर बिजली प्राप्त कर रहे हैं। 1987 में वहां गांव के कुएं से बुलबुले निकलने पर इस गैस का पता चला था। अगली चुनौती प्राकृतिक हाइड्रोजन के स्रोतों को ढूंढ़ना है।
इस वर्ष की शुरुआत में प्रकाशित एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया कि टैक्टोनिक प्लेटों के एक-दूसरे को धकेलने और खींचने से बनी दुनिया की पर्वत शृंखलाओं में हाइड्रोजन के व्यापक भंडार हो सकते हैं। हाइड्रोजन आज एक महत्वपूर्ण संसाधन है। यह दुनिया के पोषण में मदद करने के लिए उर्वरक उत्पादन में अत्यधिक मांग में है। आने वाले समय में गैस की मांग में उछाल आने की उम्मीद है, जो 2022 में नौ करोड़ मीट्रिक टन से बढ़कर 2050 तक 54 करोड़ मीट्रिक टन हो जाएगी। हाइड्रोजन बनाने के कृत्रिम तरीके उपलब्ध हैं, लेकिन वे महंगे हैं और कार्बन संतुलित नहीं हैं। प्राकृतिक हाइड्रोजन का पता लगाने के लिए अभी बहुत काम करना पड़ेगा, लेकिन इस शोध यह स्पष्ट होता है कि हाइड्रोजन का दोहन स्वच्छ ऊर्जा वाले भविष्य के लिए एक व्यवहार्य विकल्प है।
विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रिंसिपल मलोट पंजाब












