• Home
  • About Us
  • Advertise With Us
  • Contact Us
  • Privacy Policy
  • Terms & Conditions
Wednesday, February 11, 2026
  • Login
Lucknow Junction
Advertisement
  • Home
  • ट्रेंडिंग न्यूज़
  • देश
  • विदेश
  • उत्तर प्रदेश
  • विशेष
  • विभागीय
  • E-Magazine
  • अन्य
  • Home
  • ट्रेंडिंग न्यूज़
  • देश
  • विदेश
  • उत्तर प्रदेश
  • विशेष
  • विभागीय
  • E-Magazine
  • अन्य
No Result
View All Result
Lucknow junction

बाल तस्करी और न्याय की परीक्षा

News-Desk by News-Desk
December 28, 2025
in देश
0
बदलती विश्व-व्यवस्था और जी-20 की चुनौती : बहुध्रुवीयता के बीच भारत की उभरती वैश्विक भूमिका




भारत में बाल तस्करी आज केवल एक सामाजिक विकृति नहीं, बल्कि एक सुव्यवस्थित, बहुस्तरीय और संगठित आपराधिक तंत्र का रूप ले चुकी है। यह अपराध उन कमजोर सामाजिक-आर्थिक संरचनाओं में जड़ें जमाता है जहाँ गरीबी, अशिक्षा, विस्थापन, लैंगिक असमानता और प्रशासनिक उदासीनता एक साथ मौजूद रहती हैं। बाल तस्करी की भयावहता केवल इस तथ्य में निहित नहीं है कि बच्चे शोषण का शिकार बनते हैं, बल्कि इस बात में भी है कि यह अपराध अत्यंत कुशलता से कानून और न्यायिक प्रक्रिया की सीमाओं का लाभ उठाता है। इसी कारण, कड़े कानूनी प्रावधानों और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के बावजूद भारत में बाल तस्करी से जुड़े मामलों में दोषसिद्धि दर चिंताजनक रूप से कम बनी हुई है।
बाल तस्करी को ‘स्तरित संगठित अपराध’ कहा जाना मात्र एक सैद्धांतिक अभिव्यक्ति नहीं है, बल्कि यह इसके कार्य-तंत्र की वास्तविक प्रकृति को दर्शाता है। इस अपराध में सामान्यतः कोई एक केंद्रीय संचालक नहीं होता, बल्कि अनेक स्वतंत्र लेकिन परस्पर पूरक इकाइयाँ कार्य करती हैं। भर्ती करने वाला व्यक्ति प्रायः स्थानीय स्तर पर सक्रिय होता है, जो बच्चों या उनके अभिभावकों को शिक्षा, रोजगार, बेहतर जीवन या विवाह जैसे झूठे वादों के माध्यम से फुसलाता है। इसके बाद परिवहन से जुड़े एजेंट, आश्रय उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क, दस्तावेज़ों की जालसाजी करने वाले समूह और अंततः शोषण करने वाले व्यक्ति या संस्थाएँ अलग-अलग स्तरों पर सक्रिय होती हैं। इन सभी के बीच प्रत्यक्ष संपर्क न्यूनतम होता है, जिससे पूरे अपराध तंत्र को एक सूत्र में बाँधकर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना अत्यंत कठिन हो जाता है।
इस स्तरित संरचना का सबसे बड़ा लाभ अपराधियों को यह मिलता है कि प्रत्येक कड़ी स्वयं को सीमित भूमिका तक प्रतिबंधित दिखा सकती है। कोई स्वयं को केवल ‘मददगार’, कोई ‘दलाल’, तो कोई ‘नियोक्ता’ बताकर अपनी आपराधिक मंशा से पल्ला झाड़ लेता है। परिणामस्वरूप, अभियोजन पक्ष के लिए आपराधिक षड्यंत्र, साझा मंशा और संगठित अपराध को सिद्ध करना लगभग असंभव हो जाता है। यह जटिलता तब और बढ़ जाती है जब तस्करी अंतर-राज्यीय या अंतरराष्ट्रीय स्वरूप ग्रहण कर लेती है, जहाँ विभिन्न राज्यों के कानून, पुलिस तंत्र और न्यायिक प्रक्रियाएँ एक-दूसरे से समन्वित नहीं हो पातीं।
आधुनिक समय में डिजिटल प्रौद्योगिकी ने इस अपराध को और अधिक अदृश्य बना दिया है। एन्क्रिप्टेड सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, गुप्त मैसेजिंग ऐप्स और डिजिटल भुगतान प्रणालियों के माध्यम से तस्कर न केवल बच्चों की आवाजाही को नियंत्रित करते हैं, बल्कि साक्ष्यों को भी शीघ्र नष्ट कर देते हैं। इस स्थिति में पारंपरिक जाँच पद्धतियाँ अपर्याप्त सिद्ध होती हैं और अभियोजन का पूरा बोझ अंततः पीड़ित की गवाही पर आ टिकता है।
यहीं से बाल तस्करी से जुड़े मामलों में साक्ष्यगत चुनौतियों की वास्तविक समस्या प्रारंभ होती है। नाबालिग पीड़ित अक्सर भय, मानसिक आघात, सामाजिक कलंक और आर्थिक निर्भरता के कारण स्वतंत्र रूप से अपनी बात रखने की स्थिति में नहीं होते। लंबे समय तक चली शारीरिक और मानसिक यातना उनके स्मृति-तंत्र को प्रभावित करती है, जिसके कारण उनकी गवाही में असंगतियाँ, रिक्तताएँ और विरोधाभास स्वाभाविक रूप से उत्पन्न होते हैं। इसके बावजूद, परंपरागत न्यायिक दृष्टिकोण में इन असंगतियों को गवाही की अविश्वसनीयता के रूप में देखा जाता रहा है।
इतिहासतः भारतीय न्याय प्रणाली में तस्करी के शिकार बच्चों को कई बार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सह-अपराधी की तरह देखा गया। विशेष रूप से यौन शोषण या अवैध श्रम से जुड़े मामलों में यह धारणा बनी कि पीड़ित ने परिस्थितियों से समझौता किया या किसी स्तर पर अपराध में भागीदारी निभाई। इस दृष्टिकोण के कारण उनकी गवाही को अतिरिक्त पुष्टिकरण की आवश्यकता बताई गई, जबकि संगठित अपराधों में स्वतंत्र साक्ष्य उपलब्ध होना पहले से ही दुर्लभ होता है। नतीजतन, अभियुक्त संदेह का लाभ उठाकर बरी होते रहे और पीड़ित न्याय से वंचित रह गए।
शिकायत दर्ज करने में देरी भी एक बड़ी समस्या रही है। सामाजिक भय, परिवार की प्रतिष्ठा, आर्थिक असुरक्षा और अपराधियों की धमकियों के कारण पीड़ित या उनके अभिभावक प्रायः लंबे समय तक चुप रहते हैं। न्यायालयों द्वारा इस देरी को संदेह की दृष्टि से देखा जाना अभियोजन को और कमजोर कर देता है। इसके अतिरिक्त, अपराध की पूरी श्रृंखला को क्रमबद्ध रूप से न बता पाना, विशेषकर तब जब अपराध कई महीनों या वर्षों तक चला हो, पीड़ित की गवाही को तकनीकी आधार पर खारिज करने का कारण बनता रहा है।
इसी पृष्ठभूमि में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नाबालिगों को ‘पीड़ित गवाह’ के रूप में मान्यता देने का निर्देश भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली में एक गुणात्मक परिवर्तन का संकेत देता है। यह निर्देश यह स्वीकार करता है कि बाल तस्करी के शिकार बच्चे अपराध के सहभागी नहीं, बल्कि संरचनात्मक शोषण के शिकार हैं। ‘पीड़ित गवाह’ की अवधारणा गवाही के मूल्यांकन के पारंपरिक मानकों को मानवीय यथार्थ के साथ जोड़ती है और न्यायालयों को यह स्मरण कराती है कि आघात-ग्रस्त स्मृति पूर्णतः तार्किक या रैखिक नहीं होती।
इस न्यायिक दृष्टिकोण के तहत अब यह अनिवार्य नहीं रह जाता कि पीड़ित की गवाही हर बिंदु पर पूर्णतः सुसंगत और त्रुटिहीन हो। सूक्ष्म विरोधाभास, घटनाओं के क्रम में अस्पष्टता या विवरणों में अंतर को स्वाभाविक मानवीय प्रतिक्रिया के रूप में देखा जाता है, न कि झूठ या मनगढ़ंत कहानी के प्रमाण के रूप में। इससे अभियोजन को यह अवसर मिलता है कि वह अपराध की व्यापक संरचना को परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और पीड़ित के कथन के संयुक्त मूल्यांकन के आधार पर प्रस्तुत कर सके।
‘पीड़ित गवाह’ का दर्जा यह भी सुनिश्चित करता है कि शिकायत में देरी को स्वचालित रूप से गवाही की कमजोरी न माना जाए। भय, सामाजिक दबाव और मानसिक आघात को न्यायिक संज्ञान में लेते हुए अब देरी को परिस्थितिजन्य वास्तविकता के रूप में समझा जाता है। यह परिवर्तन विशेष रूप से बाल तस्करी जैसे अपराधों में महत्वपूर्ण है, जहाँ पीड़ित की चुप्पी स्वयं अपराध की निरंतरता का परिणाम होती है।
इसके अतिरिक्त, यह दृष्टिकोण स्मृति-लोप और विखंडित स्मृति को भी वैध मान्यता देता है। आघात के कारण उत्पन्न स्मृति-विघटन में पीड़ित को अपराध की पूरी श्रृंखला याद न रह पाना स्वाभाविक है। पहले जहाँ यह स्थिति अभियुक्त के पक्ष में जाती थी, वहीं अब न्यायालयों को यह विवेक प्राप्त होता है कि वे गवाही के मूल भाव और संदर्भ को महत्व दें, न कि केवल तकनीकी पूर्णता को।
इस प्रकार, ‘पीड़ित गवाह’ की अवधारणा न्यायिक प्रक्रिया को औपचारिकता-प्रधान से पीड़ित-केंद्रित यथार्थवाद की ओर ले जाती है। यह परिवर्तन न केवल दोषसिद्धि दर बढ़ाने की क्षमता रखता है, बल्कि संगठित अपराधों के मनोवैज्ञानिक और सामाजिक आयामों को भी न्यायिक विमर्श में स्थान देता है। जब पीड़ित की आवाज़ को संदेह के बजाय संवेदना और समझ के साथ सुना जाता है, तभी न्याय प्रणाली अपने वास्तविक उद्देश्य की पूर्ति कर पाती है।
फिर भी, यह स्वीकार करना आवश्यक है कि केवल न्यायिक निर्देश पर्याप्त नहीं हैं। यदि ‘पीड़ित गवाह’ की अवधारणा को प्रभावी बनाना है, तो इसके साथ-साथ जाँच एजेंसियों की संवेदनशीलता, अभियोजकों का प्रशिक्षण, गवाह संरक्षण तंत्र और पीड़ितों का पुनर्वास भी उतना ही आवश्यक है। बिना सामाजिक-आर्थिक पुनर्स्थापन के, पीड़ित पुनः शोषण के चक्र में फँस सकता है, जिससे न्यायिक उपलब्धियाँ खोखली सिद्ध होंगी।
अंततः, बाल तस्करी के विरुद्ध संघर्ष केवल कानून का प्रश्न नहीं, बल्कि नैतिक और सामाजिक उत्तरदायित्व का विषय है। सर्वोच्च न्यायालय का ‘पीड़ित गवाह’ संबंधी निर्देश इस दिशा में एक महत्त्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो यह संकेत देता है कि न्याय अब केवल प्रक्रिया का पालन नहीं, बल्कि पीड़ित के अनुभव को समझने का प्रयास भी है। यदि इस दृष्टिकोण को सशक्त संस्थागत समर्थन प्राप्त होता है, तो यह भारत में बाल तस्करी जैसे स्तरित संगठित अपराधों के विरुद्ध एक प्रभावी हथियार सिद्ध हो सकता है और न्याय की अवधारणा को वास्तव में मानवीय बना सकता है।

खबरें हटके

क्यों गायब हो रहे बच्चे?

प्रदूषण बढ़ा, लेकिन बजट कम हो गया

 

Post Views: 9

Post Views: 14
Previous Post

Lucknow junction 28 dec 2025

Next Post

विवाह, शगन के लिफाफे में बदलता रूप – एक समग्र विश्लेषण

Related Posts

सुनो नहरों की पुकार : जब आस्था पर्यावरण से संवाद करती है
देश

क्यों गायब हो रहे बच्चे?

by News-Desk
February 11, 2026
प्रदूषण बढ़ा, लेकिन बजट कम हो गया
देश

प्रदूषण बढ़ा, लेकिन बजट कम हो गया

by News-Desk
February 11, 2026
पीएनबी ने अपने 132वें स्थापना दिवस के पूर्व ‘पीएनबी सोल्जरथॉन 2026’ की घोषणा की
देश

पीएनबी ने अपने 132वें स्थापना दिवस के पूर्व ‘पीएनबी सोल्जरथॉन 2026’ की घोषणा की

by News-Desk
February 10, 2026
जगदलपुर:भारत की संस्कृति का आभूषण है बस्तर – केंद्रीय गृहमंत्री
देश

जगदलपुर:भारत की संस्कृति का आभूषण है बस्तर – केंद्रीय गृहमंत्री

by News-Desk
February 9, 2026
उत्तर प्रदेश आर्थिक समीक्षा 2025-26*
देश

उत्तर प्रदेश आर्थिक समीक्षा 2025-26*

by News-Desk
February 9, 2026
Next Post
विवाह, शगन के लिफाफे में बदलता रूप – एक समग्र विश्लेषण

विवाह, शगन के लिफाफे में बदलता रूप - एक समग्र विश्लेषण

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Cricket Live Score

POPULAR NEWS

No Content Available

EDITOR'S PICK

हडको चंडीगढ़ ने वार्षिक खेल दिवस मनाया

हडको चंडीगढ़ ने वार्षिक खेल दिवस मनाया

March 7, 2025
सिंगरौली-एनटीपीसी सिंगरौली परिसर में भक्तिभाव के साथ  दशहरा का आयोजन*

सिंगरौली-एनटीपीसी सिंगरौली परिसर में भक्तिभाव के साथ  दशहरा का आयोजन*

October 3, 2025
पाकिस्तान की जेल में भारतीय मछुआरे की संदिग्ध मौत

पाकिस्तान की जेल में भारतीय मछुआरे की संदिग्ध मौत

March 28, 2025
इस्लामाबाद – सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर और TikTok स्टार सना यूसुफ की गोली मारकर हत्या

इस्लामाबाद – सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर और TikTok स्टार सना यूसुफ की गोली मारकर हत्या

June 3, 2025

About Us

लखनऊ जंक्शन एक विश्वसनीय न्यूज़ पोर्टल है, जो लखनऊ और आसपास की ताज़ा, सटीक और निष्पक्ष खबरें आप तक पहुँचाने के लिए समर्पित है। राजनीति, समाज, शिक्षा, व्यापार, खेल और मनोरंजन से जुड़ी हर अहम जानकारी यहां मिलेगी। हम आपकी आवाज़ को मंच देने और शहर की हर हलचल से आपको अपडेट रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। लखनऊ की हर खबर, सबसे पहले, निष्पक्ष और विश्वसनीय रूप में!
E-Mail Id-lucknowjunction51@gmail.com

Follow us

Categories

  • E-Magazine
  • अन्य
  • उत्तर प्रदेश
  • ट्रेंडिंग न्यूज़
  • देश
  • विदेश
  • विभागीय
  • विशेष

Our Visitors

1826406
Total Visitors
1718
Visitors Today

Recent Posts

  • क्यों गायब हो रहे बच्चे? February 11, 2026
  • प्रदूषण बढ़ा, लेकिन बजट कम हो गया February 11, 2026
  • Lucknow junction 11 feb 2026 February 11, 2026
  • Home
  • ट्रेंडिंग न्यूज़
  • देश
  • विदेश
  • उत्तर प्रदेश
  • विशेष
  • विभागीय
  • E-Magazine
  • अन्य

©Copyright 2025, All Rights Reserved For Lucknow Junction by RA.Tech (7985291626)

No Result
View All Result
  • Home
  • ट्रेंडिंग न्यूज़
  • देश
  • विदेश
  • उत्तर प्रदेश
  • विशेष
  • विभागीय
  • अन्य
  • E-Magazine
  • Login

©Copyright 2025, All Rights Reserved For Lucknow Junction by RA.Tech (7985291626)

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Create New Account!

Fill the forms below to register

All fields are required. Log In

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In