100 विधायक लाओ और मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालिए
अखिलेश के इस बयान से आया सियासी भूचाल
लखनऊ (BNE ): उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ क्व सियासी गलियारों में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का सियासी बयान खूब उबाल मार रहा है। उनके इस बयान से भूचाल सा आ गया है। रविवार को उन्होंने सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के दो बड़े चेहरों और राज्य के उपमुख्यमंत्रियों के सामने एक बेहद चौंकाने वाला सियासी प्रस्ताव रखा। सपा प्रमुख ने खुले शब्दों में कहा कि केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक में से कोई भी नेता अपने साथ 100 विधायकों का समर्थन लेकर आए और सीधे मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज हो जाए। अखिलेश ने चुटकी लेते हुए कहा कि उन्होंने केशव प्रसाद मौर्य को यह प्रस्ताव पहले भी दिया था, लेकिन इस बार ब्रजेश पाठक के लिए भी यह सुनहरा मौका दिया गया है। अब राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि भाजपा के ये दोनों दिग्गज नेता इस बयान पर क्या पलटवार करते हैं।
शंकराचार्य के अपमान पर योगी सरकार पर तीखा प्रहार
मुख्यमंत्री पद के ऑफर के साथ ही सपा अध्यक्ष ने हालिया शंकराचार्य प्रकरण को लेकर भी राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि आज तक हमारी सनातनी परंपरा में कभी किसी शंकराचार्य को गंगा स्नान करने से नहीं रोका गया, लेकिन मौजूदा शासनकाल में ऐसा पहली बार देखने को मिल रहा है। अखिलेश यादव ने गहरी नाराजगी जताते हुए पूछा कि जिस वक्त एक संत की शिखा पकड़कर उन्हें सरेआम अपमानित किया जा रहा था, उस समय धर्म की रक्षा का दावा करने वाले लोग कहां गायब थे। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि प्रदेश की जनता इस दुर्व्यवहार को खामोशी से देख रही है और वह आने वाले समय में इसका करारा जवाब जरूर देगी।
रामभद्राचार्य से केस वापस लेना एक बड़ी भूल थी: अखिलेश
इस बयानबाजी के दौरान अखिलेश यादव ने करीब दो दशक पुरानी एक घटना का भी जिक्र करते हुए अपना कड़ा रुख स्पष्ट किया। उन्होंने जगद्गुरु रामभद्राचार्य का नाम लेते हुए कहा कि हालांकि उनके बारे में कुछ नहीं कहना चाहिए, लेकिन अगर शंकराचार्य का अपमान करने वाला व्यक्ति उनका ही शिष्य है, तो पूर्व में रामभद्राचार्य पर दर्ज धोखाधड़ी (420) का मुकदमा वापस लेना मेरी एक बड़ी भूल थी। सपा प्रमुख ने तल्ख तेवर में कहा कि उन्हें केस वापस लेने के बजाय जेल भेज देना चाहिए था। इसके अलावा, योगी सरकार के पतन की भविष्यवाणी करते हुए उन्होंने दावा किया कि प्रदेश की जनता अब इस सरकार को पूरी तरह नकार चुकी है। उन्होंने विकास कार्यों में भ्रष्टाचार और धार्मिक नेताओं के अपमान का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जनता की पीड़ा जैसे-जैसे बढ़ रही है, पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) गठबंधन उतना ही मजबूत होकर उभर रहा है।
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