bihar state foundation day:बिहार शिक्षा, राजनीति व शोध के क्षेत्र में अग्रणी राज्य
राजभवन में बिहार राज्य स्थापना दिवस समारोह का हुआ आयोजन
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बिहार के लोकगीत एवं लोक नृत्यों की हुई मनमोहक प्रस्तुतियाँ
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राज्य की सांस्कृतिक व ऐतिहासिक विविधता को दर्शाती हुई डाक्यूमेंट्री एवं प्रदर्शनी का हुआ आयोजन

लखनऊ : (BNE) आज बिहार राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर राजभवन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के मार्गदर्शन में एक समारोह का आयोजन हुआ। इस मौके पर कलाकारों ने बिहार राज्य के लोकगीतों और लोक नृत्यों पर शानदार प्रस्तुतियां दीं, जिन्हें राज्यपाल जी ने सराहा। उन्होंने बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और शिक्षा के क्षेत्र में राज्य के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि बिहार का इतिहास और संस्कृति भारत की महान धरोहर का हिस्सा है।
इस अवसर पर बिहार की धार्मिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक विविधता को दर्शाती हुई डाक्यूमेंट्री तथा प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के वैभव व वर्तमान पुननिर्मित नालंदा विश्वविद्यालय के स्वरूप पर आधारित डाक्यूमेंट्री का भी प्रदर्शन किया गया। बिहार के खान-पान, रहन-सहन, पर्व, मेले, विविध पर्यटन स्थल, ऐतिहासिक-सांस्कृतिक स्थल व अनूठी विशेषताओं पर आधारित प्रदर्शनी एवं रंगोली का भी प्रदर्शन किया गया।
बिहार स्थापना दिवस पर राज्य के लोकगीत एवं लोकनृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियाँ पेश की गईं, जिसमें संस्कृति विभाग, उ0प्र0, उत्तर मध्य सांस्कृतिक क्षेत्र, प्रयागराज, तारिका संस्थान, औरंगाबाद, सबेरा कला केन्द्र पटना के कलाकारों ने छठ गीत, मिथिलांचल का सामा-चकेवा तथा झिझिया नृत्य, होली गीत, कजरी नृत्य एवं बारहमासा लोक नृत्यों पर प्रस्तुतियाँ दीं।
अपने सम्बोधन में राज्यपाल जी ने बिहार के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को उजागर करते हुए कहा कि प्राचीन काल में बिहार शिक्षा और संस्कृति के मामले में विश्व प्रसिद्ध था। उन्होंने कहा कि बिहार शिक्षा, राजनीति, शोध के क्षेत्र में अग्रणी राज्य है। भगवान श्रीराम का ससुराल भी बिहार में ही था। नालंदा और विक्रमशिला जैसे प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों की बिहार में अवस्थिति की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह राज्य राजा जनक, चाणक्य, चन्द्रगुप्त मौर्य, विश्वामित्र, भगवान बुद्ध, भगवान महावीर और गुरु गोविन्द सिंह की पवित्र धरती है। उन्होंने उल्लेख किया कि महात्मा गांधी द्वारा प्रथम सत्याग्रह की शुरूआत चंपारण से हुई तथा प्रमुख योद्धा वीर कुंवर सिंह, लोकनायक जयप्रकाश नारायण और कर्पूरी ठाकुर जैसे महान नेताओं व दशरथ मांझी जैसे महान विभूतियों की कर्मभूमि एवं जन्मभूमि बिहार ही रही है।
राज्यपाल जी ने नालंदा विश्वविद्यालय की प्रशंसा करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में 10 हजार विद्यार्थियों द्वारा पढ़ाई की जाती थी। यहाँ का पुस्तकालय ज्ञान का भण्डार था। उन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय के पुनर्निर्माण को महत्वपूर्ण कदम बताते हुए इसके अद्भुत शैक्षिक मॉडल की सराहना की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय कई मामलों में अदभुत है, इसके पुनर्निर्माण में यहीं की मिट्टी और पानी का प्रयोग किया गया है। निर्माण कार्यों में लगी ईंटों का निर्माण यहीं की मिट्टी से किया गया है तथा बारिश के पानी का संरक्षण किया गया है।
राज्यपाल जी ने देश की नदियों को पुनर्जीवित किये जाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि हमारा दायित्व होना चाहिए कि आगामी पीढ़ियों को शुद्ध मिट्टी, शुद्ध पानी, शुद्ध हवा तथा पेड़-पौधे उपलब्ध हो सकें।
उन्होंने गुजरात में सरस्वती नदी के पुनर्जीवन का उदाहरण दिया, जो तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी जी के प्रयासों से संभव हुआ जब नर्मदा नदी का पानी सरस्वती नदी में डाला गया।
इस अवसर पर राज्यपाल जी ने सरकार द्वारा चलाई गई अमृत सरोवर योजना के माध्यम से प्राकृतिक व प्राचीन तालाबों के जीर्णोद्धार व मनरेगा योजना और इसके तहत किए गए कार्यों की सराहना की, विशेष रूप से गरीबों को मिले लाभ के बारे में चर्चा की। उन्होंने भारत की प्राचीन वैज्ञानिक उपलब्धियों, जैसे शून्य की खोज और विमान डिजाइन के बारे में भी बताया और कहा कि भारत का प्राचीन ज्ञान दुनिया में अग्रणी था।
राज्यपाल जी ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के द्वारा बिहार के विकास हेतु दरभंगा से लगभग 12 हजार करोड़ से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास, बजट-2025 में नए मखाना बोर्ड की स्थापना, पटना हवाई अड्डे का विस्तार, मिथिलांचल में पश्चिमी कोसी नहर परियोजना, औरंगाबाद एवं बेगूसराय से कई हजार करोड़ से अधिक की परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित किया गया, जो निश्चित तौर पर विकसित बिहार एवं विकसित भारत के सपने को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
राज्यपाल जी ने सभी से आह्वान किया कि हमें एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए अपनी दिशा और प्रयासों को एकजुट करना चाहिए। उन्होंने कलाकारों से यह भी कहा कि वे अपनी कला को बढ़ावा देते हुए अपनी संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों को कभी न भूलें। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति किसी भी क्षेत्र या स्थान पर कार्य करे, उसकी दिशा एवं संकल्प राष्ट्र के विकास के प्रति होना चाहिए। उन्होंने संयुक्त परिवार की महत्ता पर जोर देते हुए सभी की खुशहाली की कामना की।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव, राज्यपाल डॉ0 सुधीर महादेव बोबडे, विशेष कार्याधिकारी शिक्षा डॉ0 पंकज एल0 जानी, विशेष कार्याधिकारी राज्यपाल, अशोक देसाई, विधि परामर्शी प्रशांत मिश्र, बिहार के आमंत्रित अधिकारीगण, विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएं, कलाकारगण, राजभवन के अधिकारी/कर्मचारीगण आदि उपस्थित रहे।













