यूपी के सरकारी सिस्टम में फैल रहा भ्रष्टाचार का कैंसर!
मनोज श्रीवास्तव/लखनऊ। प्रतापगढ़ में मत्स्य पालक विभाग अभिकरण कार्यालय में तैनात मत्स्य निरीक्षक विकास कुमार दीपांकर को विजिलेंस टीम ने 14 हजार रुपये घूस लेते रंगे हाथों गिरफ्तर कर लिया। वह फाइल पास करने के नाम पर 15 हजार रुपये की मांग कर रहा था। टीम उसे गिरफ्तार करके प्रयागराज ले गई है। विजिलेंस टीम बृहस्पतिवार को विकास भवन पहुंची।मत्स्य निरीक्षक विकास कुमार को 15 हजार रुपये घूस लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया। गिरफ्तारी की खबर से पूरे विकास भवन के कर्मचारी दहशत में आ गये। प्राप्त जानकारी के अनुसार पट्टी थाना क्षेत्र के रायगढ़ गांव निवासी प्रदीप कुमार सिंह ने 24 अक्तूबर ने विजिलेंस विभाग को दिए तहरीर में कहा था कि से रायगढ़ गांव के तालाब का मत्स्य पालन पट्टे के लिए उसने किसान क्रेडिट कार्ड की मांग की थी। इसके लिए आवेदन मुख्य कार्यकारी अधिकारी मत्स्य पालक विभाग अभिकरण के कार्यालय में समस्त दस्तावेज के साथ जमा किया था। क्षेत्र के निरीक्षक अधिकारी विकास कुमार दीपांकर से मिला लेकिन दो-तीन दिन बीत जाने के बाद भी विकास कुमार दीपांकर द्वारा कोई भी कार्यवाही नहीं की।जब वह मत्स्य निरीक्षक विकास कुमार से मिला तो उन्होंने बताया कि आपका आवेदन पत्र हमने देखा है। उन्होंने कहा कि आपको लगभग एक लाख रुपये का किसान क्रेडिट कार्ड जारी हो सकता है, लेकिन इसके लिए 15 हजार रुपये देने होंगे। बृहस्पतिवार को सतर्कता अधिष्ठान प्रयागराज ने निरीक्षक धनंजय वर्मा के नेतृत्व में ट्रैप टीम का गठन कर विकास भवन प्रतापगढ़ में मत्स्य निरीक्षक विकास कुमार दीपांकर को 15 हजार रुपये घूस लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।


राजधानी लखनऊ में बुधवार को पेपरमिल चौकी में एंटी करप्शन टीम ने दारोगा धनंजय सिंह को 2 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा। चौकी इंचार्ज ने पीड़ित प्रतीक गुप्ता को गैंगरेप केस से नाम हटाने के लिए 50 लाख रुपये की डिमांड की थी, जो बाद में 2 लाख पर तय हुई। वसूली से तंग आकर प्रतीक ने एंटीकरप्शन यूनिट में शिकायत की, जिसके बाद चौकी परिसर में ही चौकी इंचार्ज को गिरफ्तार किया गया। इसी महीने चंदौली जिले के मुगलसराय कोतवाली से सटे मुख्य अग्निशमन अधिकारी कार्यालय में तैनात लिपिक कांस्टेबल राजकमल शुक्रवार को घूस लेते रंगे हाथ पकड़ा गया। उसने पटाखे की दुकान का अस्थाई लाइसेंस देने के लिए रुपये मांगे थे। पीड़ित की शिकायत पर वाराणसी से आई एंटी करप्शन टीम ने लिपिक को पकड़ा था।
इससे पहले भी कई बाबू रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े जा चुके हैं। मुख्य अग्निशमन अधिकारी कार्यालय में भी अस्पताल, स्कूल, कॉलेज और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को एनओसी जारी करने के एवज में धन की मांग की जाती है। पैसा न देने पर लंबे समय तक एनओसी लटकाया जाता है। बताते हैं कि बाबू राजकमल ने पटाखे की दुकान का अस्थाई लाइसेंस जारी करने के लिए धन की मांग की थी। आवेदक ने इसकी शिकायत विजिलेंस से कर दी।
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