जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने के लिए वनों की कटाई रोकनी होगी
वन हमारे आर्थिक, सांस्कृतिक और सामाजिक जीवन का अभिन्न अंग हैं। पेड़ों की अंधाधुंध कटाई, विशेषकर पिछले कुछ दशकों में, भारत सहित पूरी दुनिया के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है। इससे न केवल वन्यजीवों की आजीविका खतरे में पड़ रही है, बल्कि हमारी जलवायु, जैव विविधता और जीवन के लिए आवश्यक संसाधन भी खतरे में पड़ रहे हैं। वनों का प्राकृतिक पर्यावरण पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
वन जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने, कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करने, जल चक्र को संतुलित करने, मृदा क्षरण को रोकने और जैव विविधता को बनाए रखने में मदद करते हैं। इसके अलावा, वन स्थानीय समुदायों के लिए आय का एक स्रोत भी प्रदान करते हैं जो लकड़ी, ईंधन, जड़ी-बूटियों और अन्य वन उत्पादों पर निर्भर रहते हैं। पेड़ों को काटने से सभी पक्षी प्रभावित होते हैं और बाढ़, सूखा और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाएँ आती हैं।
वनों की कटाई के मुख्य कारणों में कृषि भूमि का विस्तार, शहरीकरण, अवैध कटाई और खनन गतिविधियाँ शामिल हैं। वनों को अवैध रूप से काटा जा रहा है, विशेष रूप से वनस्पतियों और वन्य जीवों के शिकार के उद्देश्य से। इससे न केवल पर्यावरणीय संकट पैदा हो रहा है, बल्कि वन्यजीव प्रजातियां भी विलुप्त हो रही हैं।
वनों की अंधाधुंध कटाई को रोकने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाना बेहद जरूरी है। सबसे पहले, हमें अवैध लकड़ी व्यापार और खनन गतिविधियों पर सख्त नियंत्रण लागू करना होगा। बढ़ती जनसंख्या और शहरीकरण को ध्यान में रखते हुए वन संरक्षण, नवीनीकरण और वन सुरक्षा योजनाओं को समर्थन दिया जाना चाहिए। दूसरी ओर, लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाना भी जरूरी है।
वन्यजीवों और प्राकृतिक संसाधनों के महत्व को समझने के लिए स्कूलों और समुदायों में शिक्षा और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं। वनों की हरियाली और जैव विविधता को बनाए रखने के लिए सभी को इस दिशा में प्रयास करने की जरूरत है।
विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रिंसिपल शैक्षिक स्तंभकार मलोट पंजाब













