भूजल को प्रदूषण से बचाया जाना चाहिए
भारत में जल संकट लगातार बढ़ता जा रहा है और इसका मुख्य कारण भूजल का अत्यधिक उपयोग और इसकी घटती गुणवत्ता है। विशेषकर उत्तर भारत के कई राज्यों के कुछ जिले, जो कृषि उत्पादन में अग्रणी हैं, भूजल प्रदूषण और घटते जल स्तर से जूझ रहे हैं। इन राज्यों में धान और अन्य फसलों के उत्पादन के लिए अधिक पानी का उपयोग किया जाता है, जिससे न केवल भूजल स्तर गिर रहा है बल्कि इसमें हानिकारक रसायन और तत्व भी मिल गए हैं। कुछ समय पहले केंद्रीय भूजल बोर्ड की एक रिपोर्ट में ये तथ्य उजागर हुए थे।
बताया गया है कि देश भर में भूजल के 20 प्रतिशत नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें से कुछ नमूनों में नाइट्रेट का स्तर मानक सीमा से अधिक पाया गया, जो जल स्रोतों के प्रदूषण का स्पष्ट संकेत है। विशेष रूप से पंजाब के भूजल के 30 प्रतिशत नमूनों में यूरेनियम का उच्च स्तर पाया गया है, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। उत्तर भारत के कई राज्यों को यूरेनियम प्रदूषण के लिए ‘हॉट स्पॉट’ के रूप में पहचाना गया है, जो दर्शाता है कि
इन राज्यों में जल संसाधनों की स्थिति अधिक चिंताजनक है। यूरेनियम और अन्य रासायनिक प्रदूषकों के सेवन से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जैसे किडनी और हड्डी से संबंधित समस्याएं। इस स्थिति से निपटने के लिए जल पुनर्चक्रण, वर्षा जल संरक्षण और कृषि में रासायनिक उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग की नीति लागू करना आवश्यक है। हमें पानी के अत्यधिक उपयोग से बचने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए ताकि भूजल को प्रदूषण से बचाया जा सके और भावी पीढ़ियों को सुरक्षित किया जा सके। विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रिंसिपल शैक्षिक स्तंभकार मलोट पंजाब













