फर्जी और मृत वोटरों का एआई से पता लगाएगा निर्वाचन आयोग
एसआईआर के दौरान चुनाव आयोग ने फर्जी या मृत मतदाताओं को शामिल होने से रोकने के लिए एआई आधारित सत्यापन प्रणाली शुरू करने का फैसला किया है। एआई प्रणाली मतदाता डाटाबेस में तस्वीरों में चेहरे का विश्लेषण कर कई स्थानों पर पंजीकृत व्यक्तियों की पहचान में मदद करेगी। अधिकारी ने बताया, मतदाताओं की तस्वीरों के दुरुपयोग के संबंध में शिकायतें बढ़ी हैं। कई स्थानों पर एक ही मतदाता की तस्वीर पाए जाने की घटनाओं का पता लगाने के लिए एआई फेशियल मैचिंग तकनीक का उपयोग किया जाएगा।
इसी बीच कन्नौज के जिला निर्वाचन अधिकारी आशुतोष मोहन अग्निहोत्री की ओर से एक पम्पलेट भी वितरित कराया जा रहा है इसका शीर्षक है समस्त मतदाताओं एवं बूथ लेविल अधिकारियों हेतु आवश्यक सूचना
1-लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा-31 के अन्तर्गत
किसी निर्वाचक नामावली की तैयारी, पुनरीक्षण या शुद्धि के, अथवा किसी प्रविष्टि के किसी निर्वाचक नामावली में सम्मिलित या उसमें अपवर्जित किए जाने के संबंध में, ऐसा कथन या ऐसी घोषणा लिखित रुप में करेगा जो मिथ्या है और जिसके मिथ्या होने का या तो उसे ज्ञान है या विश्वास है या जिसके सत्य होने का उसे होने का विश्वास नहीं है. तो वह ऐसे कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडनीय होगा।
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा-32 के अन्तर्गत
यदि कोई निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण ऑफिसर, सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण ऑफिसर या अन्य व्यक्ति जो किसी निर्वाचक नामावली की तैयारी, पुनरीक्षण या शुध्दि से संसक्त या किसी प्रविष्टी को उस निर्वाचक नामावली में सम्मिलित करने या उससे अपवर्जित करने से संसक्त किसी पदीय कर्तव्य के पालन के लिए इस अधिनियम के द्वारा या अधीन अपेक्षित है, ऐसे पदीय कर्तव्य के भंग में किसी कार्य या कार्यलोप का दोषी युक्तियुक्त हेतुक के बिना होगा, तो वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास से कम की नहीं होगी, किंतु दो वर्ष तक की हो सकेगी, और जुर्माने से दंडनीय होगा।










