• Home
  • About Us
  • Advertise With Us
  • Contact Us
  • Privacy Policy
  • Terms & Conditions
Thursday, February 12, 2026
  • Login
Lucknow Junction
Advertisement
  • Home
  • ट्रेंडिंग न्यूज़
  • देश
  • विदेश
  • उत्तर प्रदेश
  • विशेष
  • विभागीय
  • E-Magazine
  • अन्य
  • Home
  • ट्रेंडिंग न्यूज़
  • देश
  • विदेश
  • उत्तर प्रदेश
  • विशेष
  • विभागीय
  • E-Magazine
  • अन्य
No Result
View All Result
Lucknow junction

चमकते शहरों में उपेक्षित बेघर लोग

News-Desk by News-Desk
November 29, 2025
in देश
0
चमकते शहरों में उपेक्षित बेघर लोग




कड़ाके की ठंड में फुटपाथों पर बिखरी पुरानी रजाइयां, प्लास्टिक की फटी हुई चादरें और कभी-कभार धुंधली आग की लौ शहर की जगमगाती रोशनी से कटी हुई दुनिया जैसी लगती हैं। कहीं से आई कोई छोटी-सी खबर चुपचाप दब जाती है कि कड़ाके की ठंड ने फिर कुछ जिंदगियां लील लीं। ये जिंदगियां उन गुमनाम चेहरों की हैं, जो पुल के नीचे चे सिकुड़ कर लेटी रहती हैं, रेलवे स्टेशन के कोने में दुबकी रहती हैं या किसी पार्क की टूटी बेंच पर आखिरी सांस लेती हैं, लेकिन ये मौतें केवल मौसमी हादसे नहीं हैं। ये हमारी व्यवस्था की तल्ख सच्चाई हैं, समाज की संवेदनहीनता का क्रूर आईना हैं।

खबरें हटके

क्यों गायब हो रहे बच्चे?

प्रदूषण बढ़ा, लेकिन बजट कम हो गया

कुछ समय पहले एक आंकड़ा ‘सेंटर फार होलिस्टिक डेवलपमेंट’ ने जुटाया था कि नवंबर 2024 से जनवरी 2025 के बीच महज 56 दिनों में दिल्ली में 474 बेघर लोगों की ठंड मौत हो गई। | यह आंकड़ा जिला स्तर के डेटा, अस्पताल के दस्तावेज और सर्वे पर आधारित था । राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस पर स्वतः संज्ञान लेते हुए दिल्ली प्रशासन से विस्तृत रपट मांगी। मगर वास्तविक संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है। फुटपाथ पर पड़ी लाशों को अक्सर अज्ञात शव मान कर दफना दिया जाता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि 80 फीसद ऐसी मौतें बिना किसी पहचान के गुम हो जाती हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के अनुसार, 2019 से 2023 तक

3 तक पूरे देश में शीतलहर से 3,639 मौतें हुई, जिनमें बेघर और गरीब तबका सबसे ज्यादा शिकार रहा। वर्ष 2024 में ही पूरे भारत 13,238 मौतें हुई, जो 2022 #1 हुई मौतों से 18 18 फीसद ज्यादा हैं। यानी शीतलहर अब पहले से अधिक घातक हो घातक हो रही है।

में

यह संकट दिल्ली तक सीमित नहीं है। कानपुर में जनवरी 2023 के दौरान एक हफ्ते में ही 98 लोगों की मौत हो गई थी। वर्ष 2024 में उत्तर प्रदेश में ही 1,200 से ज्यादा दा लोगों की मौत हुईं। ‘नेशनल फोरम फार होमलेस हाउसिंग राइट्स’ ‘ की रपट में यह जानकारी दी गई। लखनऊ, आगरा, पटना और जयपुर जैसे शहरों में भी यही कहानी दोहराई गई। एनएचआरसी ने अक्तूबर 2025 में 19 19 राज्यों और चार केंद्र शासित प्रदेशों को चेतावनी जारी की, जिसमें बेघरों, नवजातों, , बुजुर्गों और कमजोर वर्गों को ठंड से बचाने के लिए कदम उठाने को कहा गया, लेकिन ये चेतावनियां कागजों

गईं।

वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, देश के शहरी क्षेत्रों में नौ लाख 38,348 लोग बेघर थे। मगर आज यह संख्या डेढ़ करोड़ पार कर चुकी है। दिल्ली में ही करीब तीन से चार लाख बेघर लोग हैं, जो मुख्य रूप से प्रवासी मजदूर, रिक्शा चालक, सब्जी विक्रेता, घरेलू कामगार और बुजुर्ग हैं। अगस्त 2024 में कराई गई गिनती में 1,56,369 लोग रात ग्यारह बजे सुबह 5.30 तक सड़कों पर सोते पाए गए। ये वे लोग हैं जो दिनभर शहर को चला रहे होते हैं। वे सुबह चार बजे से रिक्शा चलाते हैं, बाजारों में फल बेचते हैं, घरों में झाडू लगाते हैं, लेकिन शाम ढलते ही इनके लिए कोई जगह नहीं बचती। एक रपट के मुताबिक, महामारी के बाद प्रवासी मजदूरों की संख्या में 30 फीसद की बढ़ोतरी हुई, जिनमें से आधे से ज्यादा शहरी झुग्गियों या खुले आकाश तले रहने के लिए मजबूर हैं। आर्थिक मंदी, नौकरियों की

कमी और ग्रामीण पलायन ने इन्हें सड़कों पर धकेल दिया।

ये लोग हमारे बीच के ही हैं। एक समय वे किसानों के बेटे थे, मजदूर थे, छोटे व्यापारी थे। मगर सूखा पड़ने से और बाढ़, कर्ज तथा महंगाई ने उन्हें शहरों की ओर धकेल दिया। शहरीकरण की होड़ में गांव खाली हो रहे हैं।

शहर बड़े हो रहे हैं, लेकिन गरीबों के लिए जगह सिकुड़ रही है। दिल्ली मास्टर प्लान 2041 के तहत शहर को स्मार्ट बनाने का सपना है, लेकिन इसमें बेघरों

का कोई जिक्र नहीं। उल्टे, झुग्गी-झोपड़ियां तोड़ी जा रही हैं। कुछ समय पहले यमुना किनारे सैकड़ों झुग्गियों पर बुलडोजर चला दिया गया। लोग मलबे पर सोने लगे। बच्चे ठिठुरे, महिलाएं रोई, लेकिन विकास का पहिया रुका नहीं। एक सर्वे के अनुसार, दिल्ली में 40 फीसद बेघर लोग झुग्गी तोड़ने के बाद सड़कों आ गए। मौसम विभाग चेतावनी देता है, एनएचआरसी निर्देश देता है, संगठन आवाज उठाते हैं, लेकिन प्रशासन सोता रहता है।

हैं। असल में बेघरों को इन घरा

सरकार की योजनाएं इस संकट को दूर करने का दावा करती हैं, लेकिन जमीन पर वे खोखली साबित हो रही हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) का नारा था सबको घर वर्ष 2015 में शुरू हुई यह योजना 2022 तक सभी को पक्का घर देने का वादा लेकर आई, लेकिन 2025 आ गया और इस योजना का विस्तार कर पीएमएवाई अर्बन 2.0 लाया गया। दूसरी ओर बेघरों की संख्या घटने के बजाय बढ़ रही है। सरकार दावा करती है कि 20 मिनट में 150 घर बन रहे लेकिन ये आंकड़े कागजों के में बेघरों को इन घरों तक पहुंच ही नहीं मिलती। सितंबर 2025 में मंत्रालय ने राज्यों के साथ समीक्षा की, लेकिन समय पर केंद्रीय सहायता जारी न होने से प्रगति ठप है। यह योजना गरीबों को सशक्त बनाने का दावा करती है, लेकिन वास्तव में भवन निर्माता कंपनियों की जेब भर रही है। रैन बसेरे इस समस्या का तात्कालिक हल माने जाते हैं, लेकिन इनकी हालत देख कर बेहद निराशा होती है। ‘दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड’ के अनुसार, शहर में 325 रैन बसेरे हैं, जिनकी कुल क्षमता 16,338 लोगों की है। लेकिन ‘विंटर एक्शन प्लान 2024-25′ के तहत 197 स्थायी बसेरों में से मात्र 82 कार्यरत हैं, क्षमता सिर्फ 7,092 की है। बाकी ‘पोर्टा केबिन’ और तंबुओं में चल रहे हैं। दिल्ली सरकार ने 250 नए अस्थायी बसेरे खोलने का वादा किया। लाहौरी गेट या सराय काले खां जैसी जगहों पर भीड़ इतनी कि लोग फर्श पर सोते हैं। महिलाओं के लिए 17 बसेरे । हैं, लेकिन असुरक्षित एक

रपट

ट के अनुसार, यहां चोरी, नशाखोरी और हिंसा आम है। मास्टर प्लान के मुताबिक 330-350 स्थायी रैन बसेरे होने चाहिए थे, लेकिन अभी 80 ही हैं। यह कमी केवल उदासीनता नहीं, बल्कि पारदर्शिता के अभाव को दिखाती है। हमारा समाज, जो ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की बात करता है, सड़क पर ठिठुरते व्यक्ति को देख कर नजरें फेर लेता है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की रपट कहती है कि बेघरों को भिखारी या नशेड़ी समझा जाता है। कोई सर्वे नहीं होता कि कितने लोग खुले रहे हैं। प्रशासन अनुमान पर चलता है। कानपुर की 98 मौतें टाली जा सकती थीं, अगर समय रहते बेघरों का पता लगा लिया जाता। वैश्विक नजरिए से देखें, तो न्यूयार्क या लंदन में रैन बसेरों में चिकित्सा और बुनियादी सुविधाएँ देना अनिवार्य है। मगर भारत में ? महज एक एक कंबल और चाय।

समाधान संभव है, अगर इच्छाशक्ति हो। सबसे पहले, हर शहर र में एक व्यापक सर्वेक्षण किया जाना चाहिए, ताकि बेघर लोगों की सटीक संख्या, उनकी जरूरतों का पता लगाया जा सके। इसके बाद रैन बसेरों का विस्तार करना चाहिए। रात में गश्त की जाए, ताकि ठिठुरते लोगों को बचा कर सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जा सके। कंबल, गर्म कपड़े और सूप वितरण की व्यवस्था नियमित रूप से हो। प्रशासन को जवाबदेह बनाया जाए, हर जिले में एक नोडल अधिकारी नियुक्त हो। वहीं एनएचआरसी के निर्देशों को सख्ती से लागू करना होगा। कानूनी रूप से जीने का अधिकार मौलिक है और गरिमापूर्ण जीवन का अर्थ सिर पर छत और भोजन से भी जुड़ा है।

डॉ विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रिंसिपल मलोट पंजाब

Post Views: 10

Post Views: 11
Previous Post

बंजर जमीन में भी ताबड़तोड़ कमाई का अवसर देती है ये खेती

Next Post

पड़ोस की संस्कृति –

Related Posts

सुनो नहरों की पुकार : जब आस्था पर्यावरण से संवाद करती है
देश

क्यों गायब हो रहे बच्चे?

by News-Desk
February 11, 2026
प्रदूषण बढ़ा, लेकिन बजट कम हो गया
देश

प्रदूषण बढ़ा, लेकिन बजट कम हो गया

by News-Desk
February 11, 2026
पीएनबी ने अपने 132वें स्थापना दिवस के पूर्व ‘पीएनबी सोल्जरथॉन 2026’ की घोषणा की
देश

पीएनबी ने अपने 132वें स्थापना दिवस के पूर्व ‘पीएनबी सोल्जरथॉन 2026’ की घोषणा की

by News-Desk
February 10, 2026
जगदलपुर:भारत की संस्कृति का आभूषण है बस्तर – केंद्रीय गृहमंत्री
देश

जगदलपुर:भारत की संस्कृति का आभूषण है बस्तर – केंद्रीय गृहमंत्री

by News-Desk
February 9, 2026
उत्तर प्रदेश आर्थिक समीक्षा 2025-26*
देश

उत्तर प्रदेश आर्थिक समीक्षा 2025-26*

by News-Desk
February 9, 2026
Next Post
मार्गदर्शक प्रकाश: एक पाठ्यपुस्तक के पन्नों से परे एक शिक्षक की भूमिका 

पड़ोस की संस्कृति -

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Cricket Live Score

POPULAR NEWS

No Content Available

EDITOR'S PICK

चीन में पाकिस्तान की कूटनीतिक बेइज्जती! उप प्रधानमंत्री को रिसीव करने तक नहीं आया कोई मंत्री

चीन में पाकिस्तान की कूटनीतिक बेइज्जती! उप प्रधानमंत्री को रिसीव करने तक नहीं आया कोई मंत्री

May 21, 2025
(सामयिक विश्लेषण) टैरिफ नीति से नए ‘ग्लोबल ट्रेड’ का उदय ?

(सामयिक विश्लेषण) टैरिफ नीति से नए ‘ग्लोबल ट्रेड’ का उदय ?

August 31, 2025
गाज़ा पर फिर कहर: इजराइली हमलों में 15 की मौत, मासूमों का बहा खून

गाज़ा पर फिर कहर: इजराइली हमलों में 15 की मौत, मासूमों का बहा खून

May 13, 2025
THDCIL  द्वारा नैतिक शासन और जीवनशैली के रूप में सतर्कता को बढ़ावा देने हेतु कार्यशाला का आयोजन किया गया

THDCIL द्वारा नैतिक शासन और जीवनशैली के रूप में सतर्कता को बढ़ावा देने हेतु कार्यशाला का आयोजन किया गया

March 26, 2025

About Us

लखनऊ जंक्शन एक विश्वसनीय न्यूज़ पोर्टल है, जो लखनऊ और आसपास की ताज़ा, सटीक और निष्पक्ष खबरें आप तक पहुँचाने के लिए समर्पित है। राजनीति, समाज, शिक्षा, व्यापार, खेल और मनोरंजन से जुड़ी हर अहम जानकारी यहां मिलेगी। हम आपकी आवाज़ को मंच देने और शहर की हर हलचल से आपको अपडेट रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। लखनऊ की हर खबर, सबसे पहले, निष्पक्ष और विश्वसनीय रूप में!
E-Mail Id-lucknowjunction51@gmail.com

Follow us

Categories

  • E-Magazine
  • अन्य
  • उत्तर प्रदेश
  • ट्रेंडिंग न्यूज़
  • देश
  • विदेश
  • विभागीय
  • विशेष

Our Visitors

1829849
Total Visitors
2663
Visitors Today

Recent Posts

  • Lucknow junction 12 feb 2026 February 12, 2026
  • क्यों गायब हो रहे बच्चे? February 11, 2026
  • प्रदूषण बढ़ा, लेकिन बजट कम हो गया February 11, 2026
  • Home
  • ट्रेंडिंग न्यूज़
  • देश
  • विदेश
  • उत्तर प्रदेश
  • विशेष
  • विभागीय
  • E-Magazine
  • अन्य

©Copyright 2025, All Rights Reserved For Lucknow Junction by RA.Tech (7985291626)

No Result
View All Result
  • Home
  • ट्रेंडिंग न्यूज़
  • देश
  • विदेश
  • उत्तर प्रदेश
  • विशेष
  • विभागीय
  • अन्य
  • E-Magazine
  • Login

©Copyright 2025, All Rights Reserved For Lucknow Junction by RA.Tech (7985291626)

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Create New Account!

Fill the forms below to register

All fields are required. Log In

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In