बृजेश चतुर्वेदी
कन्नौज(BNE)हजारों साल से ऐतिहासिक नगर कन्नौज की पहचान इत्र नगरी के रूप में है। यहां पारंपरिक रूप से बनाया जा रहा इत्र अब यूनेस्को की विश्व धरोहर की सूची में शामिल होने की होड़ में है। प्रदेश सरकार ने प्रस्ताव भेजने की तैयारी की है। इसको लेकर स्थानीय पर्यटन विभाग के कार्यालय से जानकारी मांगी गई है।
बताया जाता है कि प्राचीन नगरी में इत्र को प्राकृतिक तरीके से बनाने का काम पांच हजार साल भी अधिक पुराना है। इसके साथ ही आधुनिकता के इस दौर में भी यहां स्थित कारखानों में इत्र का निर्माण प्राचीन आसवन
विधि से पारंपरिक तरीके से किया जाता है। इसके लिए डेग-भभका नामक उपकरणों का प्रयोग किया जाता है जिसमें लकड़ी की भट्ठी अब भी सुलगाई जाती है। भट्ठी पर रखे भभके में फूल या फिर जिस भी चीज का इत्र निकालना है उसे डाला जाता है और इसको मिट्टी से सील किया जाता है। इससे भभके को
बांस के पाइप से जोड़ा जाता है। फिर आसवन विधि से निकलने वाली खुशबू को भभके में संजोया जाता है। कन्नौज में इस तरह से तैयार किए जाने वाले इत्र को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए प्रस्ताव भेजने की घोषणा प्रदेश सरकार की तरफ से हाल ही में की गई थी। इसी क्रम में जिले के पर्यटन विभाग से कई सूचनाएं मांगी गईं हैं।
जिला पर्यटन अधिकारी डॉ. एम. मकबूल ने बताया कि इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक पत्र नहीं जारी हुआ है। यद्यपि विश्व धरोहर की सूची के लिए दो श्रेणी होतीं हैं मूर्त व अमूर्त तो मूर्त की श्रेणी में इत्र को इसमें शामिल करने के प्रस्ताव को तैयार किए जाने की बात कही गई है। इसको लेकर प्रदेश सरकार की तरफ से बहुत सी सूचनाएं मांगी गईं हैं। इसमें यहां कहां इत्र कारखाने हैं, कारोबार कहां तक फैला है, फूलों की खेती, इतिहास के अलावा कितने लोग किस-किस स्तर पर जुड़े हैं आदि समेत तमाम बिंदु शामिल हैं। कुल मिलाकर इत्र से संबंधित और भी कामों चीजों की जानकारी मांगी गई है जो विभाग के मुख्यालय को भेजी जाएगी। इसके बाद सरकार की तरफ से प्रस्ताव तैयार करके यूनेस्को (संयुक्त राष्ट्र शैक्षणिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन) को भेजा जाएगा। फिर यूनेस्को की टीम कन्नौज आकर इस संबंध में शोध करेगी।
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