लाडली बहना योजना नहीं, सशक्त भाई-बहनों का निर्माण चाहिए”
मध्यप्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही लाडली बहना योजना का उद्देश्य भले ही महिलाओं को आर्थिक सहयोग देना हो, लेकिन क्या यह वास्तव में उन बहनों को आत्मनिर्भर बना रहा है? हर माह 1250 रुपए की यह राशि न तो किसी महिला की आर्थिक स्थिति को स्थायी रूप से सुधार सकती है, न ही उसे आत्मनिर्भरता की ओर ले जा सकती है। यह एक तात्कालिक राहत ज़रूर हो सकती है, लेकिन स्थायी समाधान से कोसों दूर है।
क्या यह पैसा बर्बाद नहीं हो रहा?
सोचिए, यदि हर माह यह पैसा बहनों के बजाय उनके भाइयों या घर के एक सदस्य को एक सम्मानजनक नौकरी देकर दिया जाए, तो वह न केवल बहन की बल्कि पूरे परिवार की रीढ़ बन सकता है। एक आउटसोर्स कर्मचारी, जो महीने के 5 से 10 हजार रुपए में खप रहा है, अगर उसी को पर्याप्त वेतन और स्थायित्व मिल जाए, तो वह बहन को महीने में हजारों रुपए सहयोग कर सकता है—वह भी बिना किसी सरकारी लोन या स्कीम के।
आउटसोर्सिंग: युवाओं के भविष्य की कब्रगाह
मध्यप्रदेश की वर्तमान व्यवस्था में हजारों युवा आउटसोर्सिंग के जाल में फंसे हुए हैं। सरकारी विभागों, कॉलेजों, अस्पतालों और पंचायत कार्यालयों में कार्यरत ये युवा जनभागीदारी, संविदा, और ठेका व्यवस्था के अंतर्गत वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं। इन्हें न सामाजिक सुरक्षा प्राप्त है, न भविष्य की गारंटी। दस-दस वर्षों से कार्यरत कर्मचारी आज भी एक स्थायी कर्मचारी की आधी सैलरी पर काम कर रहे हैं।
सरकार ने जिन पदों को स्थायी रूप से भरना चाहिए था, उन्हें आउटसोर्स के नाम पर ठेकेदारों के हवाले कर दिया गया है। यह न केवल शोषण की नीति है बल्कि प्रतिभाओं का अपमान भी है। यही युवा यदि सम्मानजनक नौकरी में होते, तो न केवल बहनों की मदद करते बल्कि प्रदेश की आर्थिक रीढ़ बन सकते थे।
बहनों का सच्चा भला: रोजगार सृजन से
यह मानने में कोई दोराय नहीं कि महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा ज़रूरी है। लेकिन इसके लिए सरकार को रोजगार आधारित योजना बनानी चाहिए। उदाहरणस्वरूप:
महिलाओं को घरेलू उद्योगों, कुटीर शिल्प, और डिजिटल स्किल्स से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया जाए।
उनके परिवार के किसी एक सदस्य को स्थायी और सम्मानजनक रोजगार दिया जाए।
आउटसोर्सिंग को समाप्त कर नियमित भर्ती प्रक्रिया चालू की जाए।
जनभागीदारी और संविदा कर्मियों को पुनः स्थायीत्व की श्रेणी में लाया जाए।
मोहन सरकार से विनम्र आग्रह
मुख्यमंत्री मोहन यादव जी से यह अपेक्षा की जाती है कि वे केवल वोट बैंक की राजनीति से ऊपर उठकर प्रदेश के वास्तविक विकास मॉडल की ओर देखें। हर महीने लोन लेकर बहनों को राशि देना कोई दीर्घकालिक समाधान नहीं है। यह नीति आर्थिक रूप से भी प्रदेश को डुबो सकती है।
प्रदेश के युवाओं को रोज़गार देकर आप बहनों का, परिवारों का और पूरे समाज का स्थायी कल्याण कर सकते हैं।
कृपया इस दिशा में एक ठोस, स्थायी और यथार्थवादी नीति बनाएं।
क्योंकि सशक्त भाई ही सशक्त बहनों की नींव रखता है।













