

पास में ही मौजूद उनके बच्चे ने चीख-पुकार मचाई कि पापा डूब गए, तब इलाके में अफरातफरी मची। पास के दुकानदार ने सुरेश से कहा था कि आगे न बढ़ो, लेकिन वह समझ नहीं पाए और नाले में गिर गए। पूर्व पार्षद अनुराग पांडेय का कहना है कि नाले में पानी का तेज बहाव होने से सुरेश का पता नहीं चल सका। डेढ़ घंटे बाद पहुंचा बचाव दल भी सुरेश का पता नहीं कर सका। यह नाला ग्रीन कारीडोर (अटल प्रेरणा स्थल) के पास गोमती नदी में मिलता है। शनिवार को जिस जगह घटना हुई, वहां नाला सफाई के दौरान बीस जगहों पर पत्थर टूट गए थे, लेकिन नगर निगम के अभियंताओं ने पत्थरों को बदलने की कोई कोशिश नहीं की और वहां पर सुरक्षा के भी कोई इंतजाम नहीं किये। बीस दिन से पत्थर बदलने की फाइल ही तैयार हो रही थी और इस लापरवाही से सुरेश के साथ हादसा हो गया। पार्षद सीबी सिंह कहते हैं कि नगर निगम के अभियंताओं से कई बार कहा गया कि पत्थर को बदलवा दीजिए, लेकिन वह यही कहते कि अभी पत्रावली को ऊपर से मंजूरी नहीं मिली है। लिहाजा जलभराव के कारण पानी भरा होने से सुरेश नाले के टूटे पत्थर से अंजान थे और उसमे गिर गए। वह कहते हैं कि अगर बैरल नंबर 29 तक नाला बन गया होता तो जलभराव नहीं होता। अभी पानी घूमते हुए अटल स्मृति उपवन के पास गोमती नदी में जाता है, जिससे जलभराव देर तक बना रहता है। वह साल भर से नाला बनवाने की मांग कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जूनियर इंजीनियर (जेई) को तत्काल निलंबित, सहायक अभियंता (एई) को कारण बताओ नोटिस जारी करने और पीड़ित परिवार को कुल ₹9 लाख की आर्थिक सहायता (₹5 लाख मुख्यमंत्री राहत कोष तथा ₹4 लाख आपदा राहत कोष) से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उन्होंने संबंधित निर्माण एजेंसी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने का आदेश भी दिया है ताकि लापरवाही के लिए दंडित करना सुनिश्चित हो सके।योगी ने कहा कि यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक प्रणाली की गंभीर चूक है, जिसे तत्काल सुधारा जाना आवश्यक है। प्रदेश सरकार ऐसी घटनाओं को अत्यंत गंभीरता से ले रही है और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण पुनरावृत्तियाँ भविष्य में न हों।
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