बृजेश चतुर्वेदी
मोदी के सामने डैमेज कंट्रोल की कोशिश लेकर पहुंचे यूपी के डिप्टी सीएम बृजेश पाठक की कवायद फिलहाल पूरी तरह नाकाम होती दिख रही है। दिल्ली जाकर हालात संभालने की कोशिश जरूर हुई, लेकिन ज़मीनी सच्चाई यह है कि करीब 50 ब्राह्मण विधायकों की एकजुटता न सिर्फ कायम है, बल्कि और मजबूत होकर उभर आई है।
स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि पूरे देश से पी एन पाठक के पास लगातार फोन आ रहे हैं। अलग-अलग राज्यों से लोग साफ शब्दों में कह रहे हैं— “पाठक जी, हम आपका स्वागत करना चाहते हैं, आपका सार्वजनिक अभिनंदन करना चाहते हैं।” यह महज़ समर्थन नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश है।
पीएन पाठक को मिलने वाले फोन किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं हैं। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर रिटायर्ड जज, वरिष्ठ वकील और डॉक्टर तक खुलकर उनके पक्ष में खड़े दिख रहे हैं। यह संकेत है कि मामला अब सिर्फ पार्टी के भीतर का नहीं रहा, बल्कि सामाजिक और बौद्धिक वर्गों तक फैल चुका है।
आज की तारीख में, जब जाति के नाम पर गैर-ब्राह्मण समुदाय के नेता खुलकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं, तब भाजपा द्वारा जाति समीकरण साधने के नाम पर चुनाव हारे हुए चेहरे को डिप्टी सीएम बनाए जाने पर गहरे सवाल खड़े हो रहे हैं। यही वजह है कि ब्राह्मण विधायकों की बैठक और उससे जुड़ी चिट्ठी ने पूरे देश में सियासी भूचाल ला दिया है।
यह कोई मामूली बैठक नहीं थी। यह पहली बार है जब इतनी बड़ी संख्या में ब्राह्मण विधायक एक साथ सामने आए और उन्होंने अपनी राजनीतिक ताकत का खुला ऐलान किया। इस घटनाक्रम ने पूरे देश को साफ संदेश दे दिया है कि उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण समाज अब सिर्फ दर्शक नहीं रहा। वह अब संगठित है, सचेत है और सत्ता के समीकरण बनाने और बिगाड़ने की पूरी क्षमता रखता है।
अब सवाल यह नहीं है कि पार्टी नेतृत्व इसे कैसे देखता है, बल्कि सवाल यह है कि क्या इस संदेश को गंभीरता से लिया जाएगा—या फिर इसके राजनीतिक नतीजे आने वाले समय में और बड़े झटके के रूप में सामने आएंगे।
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