पाकिस्तान की परमाणु धमकी और ट्रंप का झूठा दावा बेनकाब, विदेश सचिव ने खोले कई बड़े राज
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने किया खुलासा—पाक ने नहीं दी परमाणु हमले की धमकी, भारत-पाक संघर्ष में अमेरिका की कोई भूमिका नहीं
भारत-पाकिस्तान के बीच हालिया सैन्य संघर्ष को लेकर अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे पर विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने संसदीय समिति को बताया कि यह टकराव पूरी तरह पारंपरिक था—न तो पाकिस्तान ने परमाणु हथियारों की कोई धमकी दी, न ही अमेरिका ने किसी तरह से सीजफायर कराने में भूमिका निभाई।
मिस्री ने बताया कि भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष 10 मई को दोनों देशों की आपसी सहमति से रोका गया। उन्होंने ट्रंप के इस दावे को खारिज कर दिया कि उन्होंने संभावित परमाणु युद्ध को टाल दिया। संसदीय सदस्यों के सवालों पर विदेश सचिव ने स्पष्ट किया कि भारत ने किसी भी पाकिस्तानी परमाणु ठिकाने पर हमला नहीं किया और पूरी कार्रवाई पारंपरिक दायरे में रही।
पहलगाम आतंकी हमले की जांच में सामने आया है कि हमलावर सीधे पाकिस्तान में बैठे मास्टरमाइंड से संपर्क में थे। इसके अलावा, सेना की 15 इन्फैंट्री डिवीजन के जीओसी मेजर जनरल कार्तिक सी. शेषाद्री ने बताया कि 8 मई की सुबह पाकिस्तान ने अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर को ड्रोन और मिसाइल से निशाना बनाने की कोशिश की थी। लेकिन भारतीय एयर डिफेंस ने सभी हमलों को विफल कर दिया।
पाकिस्तान की ओर से चीनी सैन्य प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल के सवाल पर मिस्री ने कहा कि इससे फर्क नहीं पड़ता क्योंकि भारत ने पाकिस्तान की एयर कैपेबिलिटी को पूरी तरह तबाह कर दिया। तुर्की के भारत विरोधी रुख पर उन्होंने कहा कि तुर्किये की ऐतिहासिक नीति भारत विरोधी ही रही है।
यह बयान न केवल ट्रंप के दावे की पोल खोलता है बल्कि पाकिस्तान के असली मंसूबों को भी जगजाहिर करता है।
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