यूपी विधानसभा में पर्यटन पर सियासी संग्राम, विपक्ष के सवालों पर मंत्री जयवीर सिंह का आंकड़ों से पलटवार
12 सर्किट मॉडल से बदलेगा पर्यटन का नक्शा, मंत्री जयवीर सिंह ने गिनाईं 366 परियोजनाएं
पर्यटन विकास हेतु 109 करोड़ बनाम 1734 करोड़, बजट तुलना के जरिए पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने साधा विपक्ष पर निशाना
मंदिर, मठ और स्मारकों के विकास पर फोकस, योगी सरकार ने कनेक्टिविटी के लिए दिए 1000 करोड़-पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह
लखनऊ: (BNE)उत्तर प्रदेश विधानसभा में सोमवार से वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट पर चर्चा शुरू होते ही पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत का मुद्दा प्रमुखता से उभरा। जिस पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने सरकार द्वारा परियोजनों और उसके बजट के आंकड़ों से विपक्ष को करारा जवाब दिया। सदन में समाजवादी पार्टी के विधायक कमाल अख्तर और नफीस अहमद ने प्रदेश के प्रमुख पर्यटक स्थलों के विकास, सौंदर्यीकरण और नई पर्यटन नीति को लेकर सरकार से तीखे सवाल पूछे। विपक्ष ने जानना चाहा कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिहाज से किन स्थलों को विकसित किया जा रहा है और प्रदेश सरकार की दीर्घकालिक नीति क्या है?
’12 सर्किट में बंटा प्रदेश, सभी वर्गों को किया शामिल-मंत्री जयवीर सिंह’
जवाब में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि सरकार ने पूरे प्रदेश को 12 पर्यटन सर्किट में विभाजित कर समग्र विकास की रणनीति अपनाई है। इनमें रामायण, कृष्ण-ब्रज, बौद्ध, महाभारत, शक्तिपीठ, आध्यात्मिक, सूफी-कबीर, जैन, बुंदेलखंड, इको टूरिज्म, वन्यजीव एवं पर्यावरण, शिल्प और स्वतंत्रता संग्राम सर्किट शामिल हैं। मंत्री ने कहा कि इन सर्किटों का गठन किसी धर्म या जाति के आधार पर नहीं, बल्कि सभी समुदायों और सांस्कृतिक विरासत को साथ लेकर किया गया है।
’110 परियोजनाएं पूरी, 366 नई स्वीकृत’
मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार, वर्ष 2022 से 2025-26 के बीच बौद्ध धर्म से जुड़ी 43, जैन धर्म से संबंधित 30, वाल्मीकि समाज के 6 पर्यटन स्थलों पर सुविधा विकसित की, रविदास समाज के लिए 19, रैदास समाज के लिए 1, कबीर पंथ के 7, गुरुद्वारों के लिए 9 और डॉ. भीमराव अंबेडकर की स्मृति में 5 परियोजनाएं समेत कुल 110 परियोजनाएं स्वीकृत कर पूरी की गई हैं। उन्होंने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि वर्ष 2017 में पिछली सरकार ने पर्यटन क्षेत्र में केवल 24 परियोजनाएं और 109 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था। इसके मुकाबले वर्तमान सरकार ने वर्ष 2024-25 में 1734.31 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है, जो 15-16 गुना अधिक है। इसी अवधि में 366 परियोजनाएं स्वीकृत की गईं और उन्हें समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा किया जा रहा है। इसके अलावा कनेक्टिविटी पर भी फोकस पर अपनी बात रखते हुए, मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों की बेहतर कनेक्टिविटी के लिए धर्मार्थ कार्य विभाग से 1000 करोड़ रुपये अलग से स्वीकृत किए गए हैं।
’विपक्षी विधायक के क्षेत्र का भी जिक्र’
सदन में मंत्री ने सीधे कमाल अख्तर का नाम लेते हुए कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्रों में भी विकास कार्य कराए गए हैं। वर्ष 2020-21 में 50 लाख रुपये की धनराशि दी गई थी। इसके अलावा ग्राम ढाकी स्थित प्राचीन शिव मंदिर के पर्यटन विकास के लिए 91 लाख रुपये और भोजीपुरा के मोइनी मंदिर के विकास के लिए 150 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
बजट बहस के बीच पर्यटन विकास को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने दिखे। जहां विपक्ष नीति की पारदर्शिता और प्राथमिकताओं पर सवाल उठा रहा है, वहीं सरकार आंकड़ों और बजट प्रावधानों के जरिए अपने कामकाज का दावा मजबूत कर रही है। स्पष्ट है कि 2026-27 के बजट सत्र में पर्यटन केवल विकास का मुद्दा नहीं, बल्कि राजनीतिक विमर्श का भी केंद्र बन चुका है। हालांकि पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने आंकड़ों से यह स्पष्ट कर दिया कि योगी सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पूर्णता कटिबंध है।
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