खगोलविद वर्षों से सौरमंडल के बाहर पानी की बर्फ की खोज कर रहे हैं। उन्हें मालूम है कि यह बृहस्पति, शनि और उसके आसपास के चंद्रमाओं और बौने ग्रहों पर मौजूद है, लेकिन अभी तक वे अन्य तारों के आसपास इसकी मौजूदगी की पुष्टि नहीं कर पाए थे। अब जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप ने उनका काम आसान कर दिया है। शोधकर्ताओं ने इस टेलीस्कोप के नियर – इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोग्राफ उपकरण को ‘एचडी 181327’ पर लक्षित किया, जो 155 प्रकाश वर्ष दूर सूर्य जैसा एक तारा है। उन्होंने पाया कि तारे के चारों और धूल भरे मलबे की डिस्क में पानी की बर्फ के क्रिस्टल घूम रहे थे। यह बर्फ हमारे सौरमंडल के काइपर बेल्ट के बर्फीले पिंडों और शनि के छल्लों जैसे स्थानों पर भी पाई जाती है । खगोलविदों को काफी लंबे समय से दूरवर्ती तारों की डिस्क में पानी की बर्फ होने का संदेह है। स्पिट्जर स्पेस टेलीस्कोप ने 2008 में ही इस बात का संकेत दिया था, लेकिन इसके उपकरण इसकी पुष्टि करने के लिए पर्याप्त रूप से संवेदनशील नहीं थे। यहीं पर वेब टेलीस्कोप तारों के आस-पास के मलबे के डिस्क को स्कैन करने के लिए सुसज्जित है। यह टेलीस्कोप बर्फ, धूल और चट्टान के सबसे हल्के निशानों का भी पता लगा सकता है। इसके उपकरण उन छोटे कणों को पकड़ सकते हैं जिन्हें दूसरे टेलीस्कोप नहीं पकड़ पाते हैं।
विज्ञानियों का कहना है कि जल बर्फ की उपस्थिति ग्रह निर्माण को सुविधाजनक बनाने में मदद करती है। बर्फीले पदार्थ अंततः स्थलीय ग्रहों पर भी पहुंच सकते हैं। एचडी 181327 एक युवा तारा है। यह सिर्फ 2.3 करोड़ वर्ष पुराना है। इसकी तुलना में हमारा सूर्य 4.6 अरब वर्ष पुराना है। यह तारा सूर्य से ज्यादा गर्म और अधिक विशाल है और इसका सिस्टम अव्यवस्थित है। धूल चट्टान और बर्फीले पिंड आपस में टकराते हैं और बिखर जाते हैं, जिससे एक अव्यवस्थित मलबे की डिस्क बन जाती है। एचडी 181327 एक बहुत ही सक्रिय सिस्टम है। इसके मलबे की डिस्क में नियमित रूप से टकराव होते रहते हैं। जब ये बर्फीले पिंड आपस में टकराते हैं, तो वे धूल भरे पानी के छोटे-छोटे कण छोड़ते हैं।
वेब टेलीस्कोप इन कणों को देख सकता है। ये कण आपस में चिपक सकते हैं, जिससे नए ग्रहों के बीज बन सकते हैं। लाखों वर्षों में, बर्फीले मलबे चट्टानी दुनिया में पानी और अन्य महत्वपूर्ण यौगिक पहुंचा सकते हैं। शोधकर्ताओं को लगता है कि इसी तरह से पृथ्वी को पानी मिला जब बर्फीले धूमकेतु और क्षुद्रग्रह युवाकाल में उससे टकराए थे। खगोलविदों के समक्ष एक बड़ा सवाल यह है कि क्या बर्फीले पिंड निर्माणाधीन ग्रहों तक पानी पहुंचा सकते हैं? और यदि ऐसा है, तो क्या ये ग्रह रहने योग्य परिस्थितियां भी विकसित कर सकते है ? वेब के उपयोग से इन सवालों का जवाब मिल सकता है।
विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रिंसिपल मलोट पंजाब
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