शशि थरूर बना भारत की विदेश नीति का बाज़, बिलावल भुट्टो पर बरसी पाकिस्तानी एक्सपर्ट्स की फजीहत
पहलगाम हमले के बाद भारत ने कूटनीतिक मोर्चा संभाला; बिलावल को थरूर की नकल करने वाला ‘बंदर’ बताकर पाकिस्तान ने खुद ही खोली पोल
पहलगाम आतंकी हमले और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भारत ने आतंकवाद के खिलाफ कूटनीतिक मोर्चा खोल दिया है। भारत की ओर से कांग्रेस सांसद और विदेश नीति के जानकार शशि थरूर को अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों की अगुवाई के लिए चुना गया है, जिनका लक्ष्य वैश्विक मंच पर भारत का मजबूत पक्ष और ठोस सबूतों के साथ आतंक के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति को प्रस्तुत करना है।
भारत की इस पहल से बौखलाए पाकिस्तान ने भी एक डेलीगेशन गठित किया है और उसमें पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी को प्रमुख बनाया गया है। लेकिन बिलावल की कूटनीतिक साख और अनुभव को लेकर खुद पाकिस्तान के भीतर सवाल उठने लगे हैं।
पाकिस्तानी विश्लेषकों का कहना है कि बिलावल न तो थरूर जैसी समझ रखते हैं, न ही वैश्विक कूटनीति के मंचों पर उन्हें गंभीरता से लिया जाता है। पाकिस्तानी-अमेरिकन पॉलिटिकल एक्सपर्ट मोइद पीरजादा ने बिलावल को ‘नकलची बंदर’ बताते हुए कहा कि वह सिर्फ शशि थरूर की शैली की नकल करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन उनके पास वह अनुभव, संपर्क और प्रभाव नहीं है।
जहाँ थरूर संयमित शब्दों में भारत की ‘नो फर्स्ट यूज़’ न्यूक्लियर पॉलिसी और आतंक के खिलाफ ठोस सबूतों के साथ दुनिया को संदेश दे सकते हैं, वहीं बिलावल अपने पुराने बयानों जैसे “सिंधु जल पर खून बहेगा” जैसी धमकियों के लिए जाने जाते हैं, जो पाकिस्तान की कट्टरपंथी और सैन्य मानसिकता को उजागर करते हैं।
शशि थरूर की कूटनीतिक विरासत और वैश्विक प्रभाव को देखते हुए पाकिस्तान का यह प्रयास खुद उसके लिए उल्टा पड़ता दिख रहा है। भारत ने जहां एक संतुलित लेकिन निर्णायक मोर्चा खोला है, वहीं पाकिस्तान की चाल खुद उसके गले की फांस बनती जा रही है।
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